Sat. May 16th, 2026

निरीक्षण के पहले ही कॉलोनाइजर को जारी कर दिया मंडी ने नोटिस

कृषि उपज मंडी सचिव का अनोखा कारनामा

>
बिना ‘निरीक्षण’ किए ही थमा दिया नोटिस, तारीखों के खेल ने खोली सचिव की कार्यप्रणाली की पोल
>
बदनावर। स्थानीय कृषि उपज मंडी समिति बदनावर की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक मुस्तैदी पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। मंडी प्रशासन का एक ऐसा अजीबो-गरीब कारनामा सामने आया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। मंडी सचिव की घोर लापरवाही के चलते विभाग ने भविष्य में होने वाले निरीक्षण के आधार पर भूतकाल में ही नोटिस जारी कर दिया। कागजों पर तारीखों का यह ऐसा घालमेल है, जिसने मंडी कार्यालय की कार्यशैली को पूरे क्षेत्र में हास्यास्पद बना दिया है।

       मामला कृषि उपज मंडी समिति बदनावर द्वारा विरमणी पार्क कॉलोनी निवासी आयुष्मान जैन को मंडी प्रांगण की ओर अनाधिकृत रूप से ड्रेनेज सिस्टम (गंदा पानी) निकालने के संबंध में एक नोटिस जारी किया गया है। इस सरकारी पत्र क्रमांक/मण्डी/नियमन/2026-27/129 की तारीख 17.04.2026 दर्ज है।

हैरानी की बात यह है कि इसी पत्र के सन्दर्भ वाले कॉलम में साफ-साफ लिखा गया है – “निरीक्षण दिनांक 18.04.2026 के संबंध में।” जो निरीक्षण से पहले ही तैयार हो गया फरमान।

      अब सवाल यह उठता है कि जो निरीक्षण 18 अप्रैल को होना तय था या हुआ, उसकी रिपोर्ट और उसके आधार पर नोटिस 17 अप्रैल को ही कैसे टाइप होकर जारी कर दिया गया? क्या मंडी सचिव के पास कोई ऐसी "दिव्य शक्ति" है जिससे उन्हें एक दिन पहले ही पता चल गया कि अगले दिन निरीक्षण में क्या कमियां मिलने वाली हैं? या फिर बंद कमरों में बैठकर, बिना मौके पर जाए ही, सिर्फ कागजी खानापूर्ति करने के लिए यह फरमान जारी कर दिया गया?

     इस नोटिस पर बाकायदा सचिव, कृषि उपज मंडी समिति बदनावर के हस्ताक्षर और सील भी मौजूद हैं। इतने महत्वपूर्ण और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी वाले शासकीय पत्र पर बिना सोचे-समझे, बिना तारीखों की जांच किए हस्ताक्षर करना यह साफ दर्शाता है कि मंडी कार्यालय में किस कदर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया हावी है।

क्या मंडी प्रांगण में सारे शासकीय कार्य इसी तरह आंखें मूंदकर किए जाते हैं। जब अधिकारी खुद अपनी ही तारीखों को लेकर सजग नहीं हैं, तो उनके द्वारा की जाने वाली कार्रवाई की वैधता पर सवाल क्यों न खड़े हों। क्या उच्च अधिकारी जैसे कलेक्टर जिला धार या संयुक्त संचालक इंदौर इस प्रकार की गंभीर लिपिकीय और प्रशासनिक लापरवाही का संज्ञान लेंगे।

     यह मामला आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। लोग मंडी सचिव की इस "एडवांस कार्यप्रणाली" पर चुटकियां ले रहे हैं। देखना यह होगा कि इस फजीहत के बाद जिम्मेदार अधिकारी अपनी गलती को सुधारते हैं या फिर इसी तरह बिना निरीक्षण के ही भविष्य के नोटिस बांटते रहेंगे।

Related Post