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मुख्यमंत्री राहत पैकेज में ₹8.51 लाख का गबन; पात्र हितग्राही की जगह दूसरे ने डकारी राशि, FIR दर्ज, कार्यवाही की मांग​

मुख्यमंत्री राहत पैकेज में ₹8.51 लाख का गबन; पात्र हितग्राही की जगह दूसरे ने डकारी राशि, FIR दर्ज, कार्यवाही की मांग​

बड़वानी (नरेन्द्र गुप्ता):- सरदार सरोवर परियोजना के पुनर्वास कार्यों में एक बार फिर बड़ी विभागीय लापरवाही और वित्तीय धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री राहत पैकेज के तहत एक पात्र हितग्राही के लिए स्वीकृत 8,51,045 रुपये की बड़ी राशि को एक अन्य व्यक्ति ने फर्जी तरीके से हड़प लिया। इस गंभीर मामले में शिकायत निवारण प्राधिकरण (GRA) इंदौर के कड़े रुख के बाद, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के अधिकारियों ने आरोपी के खिलाफ कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया है।​विभागीय चूक का फायदा उठाकर किया फर्जीवाड़ा​दस्तावेजों के अनुसार, असली हितग्राही की जगह शोभाराम पिता गोपाल राठौर (निवासी सोन्दुल, हाल मुकाम नवलपुरा, बड़वानी) ने फर्जी तरीके से दस्तावेजों का उपयोग कर आठ लाख इक्यावन हजार पैंतालीस रुपये की राशि आहरित कर ली।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह राशि मुख्यमंत्री राहत पैकेज के तहत वितरित की जानी थी, लेकिन सत्यापन प्रक्रिया में हुई भारी चूक के कारण गलत व्यक्ति के हाथों में चली गई, ​शिकायत निवारण प्राधिकरण (GRA) के आदेश पर कार्रवाई​इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब असली हितग्राही ने न्याय के लिए शिकायत निवारण प्राधिकरण (GRA), इंदौर का दरवाजा खटखटाया। प्रकरण क्रमांक 182/2024 पर सुनवाई करते हुए प्राधिकरण ने 3 फरवरी 2026 को आदेश जारी कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे।​पुलिस ने दर्ज किया मामला​GRA के निर्देशों के पालन में, कार्यपालन यंत्री (NVDA) पुनर्वास संभाग बड़वानी, एस.एस. चौंगड़ ने कोतवाली पुलिस को लिखित आवेदन सौंपा। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:​FIR नंबर: 0199/2026 दर्ज किया है। इसमे आरोपी शोभाराम के विरुद्ध धारा 419 (प्रतिरूपण द्वारा छल) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत केस दर्ज किया गया है।​शिकायतकर्ता: विभाग की ओर से रामनाथ जम्होरिया (अनुविभागीय अधिकारी, NVDA) ने प्रकरण दर्ज कराया है।​पात्र हितग्राही दर-दर भटकने को मजबूर​एक तरफ प्रशासन विस्थापितों के बेहतर पुनर्वास और पारदर्शिता के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के मामलों ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है, विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा असली पात्र हितग्राही भुगत रहा है, जो अपनी ही राशि पाने के लिए अब भी सिस्टम से लड़ रहा है। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि इस खेल में शामिल अन्य कड़ियों का भी पता लगाया जा सके।सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार धर्मेंद्र केवट ने पुलिस विभाग से मांग कि है शीघ्र जाँच कर आरोपी के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करे एवं नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण पात्र हितग्राही को तत्काल मुआवजा राशि प्रदान करे

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