
दतीगांव के जन्मदिन पर संगठित भाजपा बंटी गुटो में
जन्मदिन की बधाई के होर्डिंग्स में कई नेताओ के फोटो हुए गायब
गायब फोटों को लेकर क्षेत्र की राजनीती गरमाई

न्यूज एडिटर/महेश पाटीदार
ठंड मे गर्मी का एहसास
बदनावर। मौसम का पारा जैसे जैसे गिरता जा रहा है वैसे वैसे भाजपा की राजनीती में उबाल बढता जा रहा है।। जब भी क्षेत्र में भाजपा का बडा आयोजन होने की आहट होती है, क्षेत्र में भाजपा नेता एवं संगठन में गुटबाजी की हवा चल पढती है। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का दौरा हो या पार्टी का अन्य कोई आयोजन हेतु लगे बेनर पोस्टर में भाजपा में फाड ही फाड दिखाई देती है। हाल ही में दतीगांव के जन्मदिन की बधाई में लगे बेनर में पूर्व पदाधिकारी के फोटो गायब है। दतीगावं के जन्मदिन के पहले ही संगठित भाजपा गुट में बंटा दिखाई देता है।

जैसे जैसे सता मे भाजपा का समय बढता जा रहा है, वैसे वैसे विधानसभा मे भाजपा नेताओं में आपसी खींचतान भी बढ़ती जा रही है। बदनावर विधानसभा में इन दिनों कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा है। गुटीय राजनीती के चलते कार्यकर्ताओं में भी असंमजस की स्थिति है। भाजपा में जब भी कोई बडा आयोजन होता है नेताओ व कार्यकर्ताओ के बीच गुटीय राजनीती पनप जाती है। जन्मदिन एवं विभिन्न कार्यक्रमों के बेनर फलैक्स व विज्ञापन से संगठन एवं पार्टी के प्रति निश्ठावान कार्यकर्ताओं के फोटो गायब रहते है। जो कि भाजपा के लिए आत्मघाती कदम हो सकता है।
दतीगांव के जन्मदिन की बधाई के होडिग्स में भाजयुमो व भाजपा पूर्व पदाधिकारी के गायब फोटो आए चर्चा मे-
पूर्व मंत्री राजवर्धनसिंह दतीगांव के जन्मदिन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी एवं भाजपा नगर मंडल बदनावर द्वारा बस स्टेंड पर लगाए होडिग्स पर पूर्व राज्यमंत्री राजेश अग्रवाल, पूर्व धार जिलाध्यक्ष मनोज सोमानी एवं युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष जय सूर्या सहीत भाजपा के कई कर्मठ कार्यकर्ताओं के फोटो गायब होने पर बैनर चर्चा में आ गए।
बेनर पोस्टर के खेल में गुटीय राजनीती उभरकर सामने आ रही है।
पूर्व मंत्री दतीगांव की विधानसभा चुनाव 2023 में हार के बाद से ही बदनावर विधानसभा में भाजपा गुटों में बंटी दिखाई दे रही है। भाजपा में दतीगांव व सोमानी- अग्रवाल के बीच खेमे बाजी चल रही है। दतीगांव को जन्मदिन की बधाई के बेनर में कई भाजपा नेताओं के फोटो गायब होने से फोटों का मामला विधानसभा षेत्र में चर्चा में आ गया। गुटीय राजनीती किन नेताओं के इशारे पर हो रही है। वर्तमान में आयातीत एवं पुराने कार्यकर्ताओं के बीच गुटीय खाई बढती जा रही है। दोनों ही गुट एक दूसरे को पचा नही पा रहे है तथा पोस्टर के माध्यम् से में नेता पटकनी देते रहते है। जबकि गुटीय राजनीती में इमानदार कार्यकर्ताओं की बली चढ रही है।

