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सिरप हो या पानी, यहाँ ज़हर ‘सिस्टम’ में है नेता प्रति पक्ष — सिघार

सिरप हो या पानी, यहाँ ज़हर ‘सिस्टम’ में है।
इंदौर जल-प्रदूषण कांड: भाजपा सरकार की घोर लापरवाही और प्रणालीगत विफलता


 भोपाल। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के भगीरथपुरा वार्ड क्रमांक-11 में पेयजल में सीवेज मिलने से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य संकट पर भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया। दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई इस त्रासदी में अब तक 16 से अधिक नागरिकों की मौत, सैकड़ों लोगों की गंभीर बीमारी और हजारों नागरिकों के प्रभावित होने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह घटना कोई आकस्मिक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही, देरी और संवेदनहीन  शासन का परिणाम है।

प्रमुख तथ्य और प्रस्तुत बिंदु:

  1. आम नागरिकों के लिए पानी तक ज़हर बना दिया गया
  • दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में भगीरथपुरा वार्ड-11 में पीने के पानी में सेप्टिक  टैंक का पानी मिला।
  • 16+ मौतें, 15+ ICU में, 150+ अस्पताल में भर्ती, और 2500+ नागरिक बीमार हुए।
  • मृतकों में 6 माह का मासूम बच्चा “अव्यान साहू” भी शामिल है।
  • स्थानीय नागरिकों और पत्रकारों के अनुसार वास्तविक आंकड़े सरकार द्वारा बताए गए आंकड़ों से अधिक हैं।
  • नववर्ष के जश्न के बीच कई घरों में मातम पसरा रहा।
  • यह वही इंदौर है जहाँ 30–31 अगस्त 2025 की रात, इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में दो मासूम बच्चियों को चूहों ने काट डाला और उनकी मृत्यु हो गयी
     
  1. यह हादसा नहीं, लापरवाही से हुई मौत है
  • मुख्य पेयजल पाइपलाइन के ऊपर बिना सेप्टिक व्यवस्था के शौचालय बना हुआ था।
  • पाइपलाइन लीकेज के कारण सीवेज सीधे नलों तक पहुँचा।
  • महीनों से गंदे पानी की शिकायतें अधिकारियों, जलप्रदाय विभाग और मेयर हेल्पलाइन तक की जाती रहीं।
  • प्रशासन ने तब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जब तक निर्दोष जानें नहीं चली गईं।
     
  1. ढाई साल तक दबा रहा पाइपलाइन टेंडर — क्यों?
  • 25 नवंबर 2022: मेयर-इन-काउंसिल संकल्प क्रमांक 106 के तहत नई पेयजल पाइपलाइन का निर्णय।
  • 30 जनवरी 2023: संकल्प संबंधित विभागों को भेजा गया।
  • 30 जुलाई 2025: ₹2.4 करोड़ का टेंडर (ID: 2025-UAD-442711-18) जारी हुआ; 6 फर्मों ने आवेदन किया।
  • टेंडर जारी होने के बाद भी लगभग 5 महीने तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
  • यदि समय पर काम होता, तो यह त्रासदी टल सकती थी — देरी की जिम्मेदारी कौन लेगा
     
  1. निलंबन जवाबदेही नहीं, डैमेज कंट्रोल है
  • कुछ छोटे अधिकारियों के निलंबन से सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
  • बड़े निर्णय लेने वाले अधिकारी और राजनीतिक पदाधिकारी अब भी सुरक्षित हैं।
  • यह ऐसा है जैसे आग लगाने वाला बच जाए और माचिस पकड़ने वाले को सज़ा दे दी जाए।
     
  1. पूर्ण सत्ता, शून्य संवेदना
    ·        माँ अहिल्या की नगरी इंदौर ने भाजपा को हर स्तर पर समर्थन दिया — विधानसभा, संसद, नगर निगम और सत्ता का पूरा भरोसा। लेकिन बदले में भाजपा ने इंदौर को सिर्फ़ उपेक्षा, अव्यवस्था, धोखा और संवेदनहीन शासन दिया।
  • इतने पूर्ण जनादेश के बावजूद नागरिकों को सुरक्षित पेयजल तक उपलब्ध नहीं।
  • मंत्रियों द्वारा पीड़ितों के सवालों पर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
  • वहीं देवास के SDM ने मंत्री की ही बात दोहराई थी, फिर भी उन्हें निलंबित कर दिया गया—या यह सज़ा कांग्रेस को प्रदर्शन की अनुमति देने की थी।
     
  1. जनता शोक में, मुख्यमंत्री मंच पर मनोरंजन
    ·        2 जनवरी – मुख्यमंत्री उज्जैन ज़िले की खाचरौद तहसील में एक कार्यक्रम के मंच पर मौजूद थे।
    ·        जहाँ एक ओर शोक और मातम का माहौल था, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री मंच से ‘रेवड़ी’ के मज़े सुना रहे थे |
    ·        यह बता रहे थे कि पपड़ी हटाने पर कैसे “असली माल” मिलता है।
    ·        जब जनता शोक में हो, तब मंच से हँसी |
    ·        क्या यही मुख्यमंत्री का आचरण होता है?
    ·        वे भी तब, जब वे इंदौर के प्रभारी मंत्री भी हैं।
     
  2. स्वच्छता रैंकिंग बनाम ज़मीनी हकीकत
  • इंदौर लगातार 8 बार “सबसे स्वच्छ शहर”, वर्ष 2025 में भी शीर्ष स्थान पर।
  • नगर निगम बजट ₹8,000 करोड़ से अधिक — प्रदेश में सबसे ज़्यादा।
  • फिर भी नागरिकों को नल से साफ पानी नहीं मिल पा रहा।
  • स्वच्छता पुरस्कार आज जनता के लिए कटु व्यंग्य बन चुका है।
     
  1. स्वास्थ्य संकट में भी पारदर्शिता का अभाव
  • अब तक नियमित हेल्थ बुलेटिन जारी नहीं किए गए।
  • हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका में दायर 2 जनवरी की रिपोर्ट में भी आंकड़े कम दिखने की कोशिश की गयी है।
  • मौतों, गंभीर मामलों और भर्ती मरीजों की वास्तविक संख्या स्पष्ट नहीं।
  • मांग की गई कि हर 12 घंटे में स्वास्थ्य बुलेटिन जारी किया जाए।
     
    9.  ट्रैफिक और अधूरी सड़कें
    ·        शहर के लगभग हर रास्ते पर गड्ढे हैं।
    ·        वर्षों से लगभग सभी फ्लाईओवरों पर काम “चल रहा है”, लेकिन किसी का भी काम समय पर पूरा नहीं हुआ।
    ·        रोज़मर्रा की ज़िंदगी ट्रैफिक जाम में फँसी हुई है — दफ़्तर, स्कूल, अस्पताल पहुँचना चुनौती बन चुका है।
    ·        राऊ सर्किल फ्लायओवर (₹47 करोड़, जनवरी 2025 उद्घाटन) कुछ महीनों में क्षतिग्रस्त।
    ·        मार्च 2025 में उच्च न्यायालय ने BRTS कॉरिडोर हटाने के निर्देश दिए, बावजूद सरकार विफल।
     
  1. ड्रेनेज घोटाला
    ·        2012–2023 के ड्रेनेज घोटाले में करोड़ों के फर्जी बिल पास किए गए।
    ·        जिन ड्रेनेज कार्यों का निर्माण ही नहीं हुआ, उनके भी बिल पास।
    ·        यह 125 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला वर्ष 2024 में उजागर।
    ·        कई FIR दर्ज, लेकिन ठोस कार्रवाई आज तक नहीं।
     
  2. एक पार्षद, महल जैसा बंगला — पैसा आया कहाँ से?
    ·        हाल ही में इसी इंदौर शहर से भाजपा के पार्षद मनीष शर्मा और उनके आलीशान बंगले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
    ·        महल जैसे घर, स्विमिंग पूल, सजा-धजा गार्डन और अंदर चलती पार्टी,
    ·        एक पार्षद के शाही ठाठ—यह पैसा आखिर आया कहाँ से?
    ·        क्या यह वही पैसा है जो नलों, ड्रेनेज और सड़कों पर खर्च होना था?
     
    मुआवज़ा और जवाबदेही
    ₹2 लाख की सहायता किसी की जान की कीमत नहीं हो सकती। यह मुआवज़ा नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही से बचने का प्रयास है। 1 करोड़ तक मुआवजा मिलना चाहिए।
    ज्यादातर पीड़ित परिवार गरीब ओर मजदूर वर्ग से जो बीमार होने के कारण रोजगार से भी वंचित, क्या सरकार कर पाएगी उनके मजदूरी की भरपाई|
     
    निष्कर्ष
    इंदौर जल-प्रदूषण कांड भाजपा सरकार की लापरवाही, देरी और संवेदनहीन शासन का परिणाम है। जब तक दोषियों पर ठोस कार्रवाई, समयबद्ध सुधार और पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती, यह संकट समाप्त नहीं माना जा सकता।
    विपक्ष पीड़ित नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई पूरी ताकत से जारी रखेगा।
     

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