भाजपा में मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति तेरा सर्मथक, मेरा सर्मथक, किसका सर्मथक में उलझी

नियुक्त मंडल अध्यक्ष आगे से पार्टी का झंडा उठाएगे या व्यक्ति विशेष का – शोषल मीडिया पर बहस
चर्चा बदनावर नगर मंडल पर किसका होगा कब्जा
बदनावर/ महेश पाटीदार
भाजपा मंें संगठन चुनाव के माध्यम से कार्यकर्ताओं में नई उर्जा का संचार हुआ है। वही जिले में भाजपा नेताओं की आपसी खींचतान भी उजागर हुई है। जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा 30 मंडल अध्यक्ष की घोषणा कर राहत की सांस ली ही थी कि सादलपुर मंडल में नियुक्ति को लेकर बवाल हो गया। नियुक्ति में हुई लापरवाही के चलते ताबडतोड नियुक्ति निरस्त करना पडी। वही सरदारपुर में भी नेताओं की आपसी खींचतान लंबी होने से बुथ अध्यक्षों ने नियुक्ति का विरोध फुट पडा। साथ ही जो नियुक्ति की गई वह भी तेरा सर्मथक, मेरा सर्मथक, उसका सर्मथक में उलझ कर रह गईं। नवनियुक्त अध्यक्षों के सामने पेशोपेश की स्थिति बन गई है।भाजपा संगठन द्वारा मंडल अध्यक्षो की नियुक्ति की गई। यह नियुक्ति पार्टी के लिए गई या व्यक्ति के लिए। आमजन के बीच चर्चा का विशय बन गया है। संगठन द्वारा मंडल अध्यक्ष की निुयक्ति ने संगठीत भाजपा की पोल खोल दी है। जिले में सरदारपुर व बदनावर विधानसभा में काफी हो हल्ला हो रहा है। नियुक्त मंडल अध्यक्ष आगे से पार्टी का झंडा उठाएगे या व्यक्ति विशेष का यह मुददा शोशल मिडिया मे छाया है! बदनावर विधानसभा में नियुक्त तीन मंडल अध्यक्ष को लेकर चर्चा है कि कौन किसका सर्मथक है। किसी को पूर्व दत्तीगांव सर्मथक बता रहे है तो किसी को सोमानी सर्मथक। बहारहाल तीन मंडल में अघ्यक्ष की निुयक्ति को लेकर बहस जारी है। चर्चा यह भी है कि पार्टी ने मंडल अध्यक्ष बनाए है या पठ्ठावाद का बढावा दिया है। कहना मुश्किल र्है। यहां कहावत चरितार्थ होती है कि दिल बहलाने के लिए ख्याल अच्छा हैै, संतोष मेरा है, संजू उसका है तो गोंविद किसका है। नेताओं की आपसी खींचतान ने नियुक्त अध्यक्ष के लिए प्रश्न खडा कर दिया है कि किसके पास जाएं। एक के पास जांएगें तो दूसरा नाराज और दूसरे के पास चले गए तो पहला की टीम मे नम्बर मे कटोती हो जायेगी! बदनावर नगर मंडल पर होगा किसका कब्जा-बदनावर नगर मंडल में अध्यक्ष की नियुक्ति होल्ड है। ईस पर सबकी निगाहे लगी है कि इस मंडल में कौन बनेगा अध्यक्ष। सभी दावेदार अपने स्तर पर जोड तोड में लगे है। दावेदारों में सबसे मजबूत कौन है। कह नहीं सकतेे। इतना अवश्य है कि राजनीती मे कोई स्थाई विरोधी नहीं होता है। कोई पदाधिकारी आज जिसके पाले में है कल को विरोधी की टीम में शामिल हो सकता है। भाजपा की बढती गुटबाजी में अध्यक्ष किस गुट का बनेगा। कहना मुश्किल है। किंतु जो बनेगा वह गुटबाजी से परे नहीं रह सकेगा। और अंत मे- भाजपा संगठन चुनाव में जिस तरह का माहौल देखा गया है। उससे प्रतीत होता है कि भाजपा काफी मजबूत स्थिति में है। हालांकि विधानसभा चुनाव दूर है किंतु बिसात अभी से बिछायी जाने लगी है। एक पखवाडे में जिलाध्यक्ष की घोशणा होे सकती है। तब तक नियुक्ति पर विराम लगा है। जिलाध्यक्ष की घोषणा के बाद नया माहोल देखने को मिलेगा, तब तक इंतजार करना पडेगा।





