चित्र कैसा भी हो चरित्र अच्छा होना चाहिए ,
हरिप्रकाशदाश महाराज

थानंदलाश्री संकट मोचन सेवा समिति एवं श्री कष्टभंजनदेव भक्त मंडल ने स्वामीजी का किया नागरिक अभिनंदन,झाबुआ। श्री संकट मोचन सेवा समिति हनुमान टेकरी एवं श्री कष्टभंजनदेव भक्त मंडल द्वारा शहर के लक्ष्मीनगर स्थित अंबा रिसोर्ट पर आयोजित तीन दिवसीय श्री हनुमान चरित्र कथा के अंतिम दिवस कथा का रसपान करने झाबुआ जिले ही अपितु गुजरात और राजस्थान के अलग-अलग स्थानों से हजारों भक्त कथा पांडाल में एकत्रित हुए,
इस कड़ी में
थांदला से सैकड़ो भक्तों के साथ कंचन सामाजिक सेवा संस्थान संपूर्ण भारत भारतीय गौरक्षा वाहिनी भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा मध्यप्रदेश के संगठन के पदाधिकारियों गोरक्षा प्रदेश महामंत्री अजा मोर्चे प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य पार्षद राजू धानक गोरक्षा जिला अध्यक्ष मोहनलाल यादव ,यतीश दामजी समाजसेवी , सकल पंच बलाई समाज के संरक्षक अम्रत लाल चौहान गो भक्त नटवरलाल दिनेश छाजेड़ धानक मुन्ना कश्यप चंकी वाले, अंकित परमार आदि कार्यकताओं कथा में आए हजारों भक्तों का पुष्प वर्षा से स्वागत करते हुए , भगवान हनुमान चरित्र कथा सुंदर वर्णन के कथावाचक हरि प्रकाश दास महाराज जी सारंगपुर का स्वागत सम्मान कर आशीर्वाद लेकर महा आरती कार्यक्रम शामिल होकर कथा का श्रवण किया , सुंदर भव्य आयोजन कार्यक्रम के लिए आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया ,

कथा में भीड़ से पूरा पांडाल खचाखच भर गया। कथा पांडाल में भक्तों की भारी भीड़ के चलते पैर रखने तक की जगह नहीं बची। कथा के तीसरे दिन श्री कष्टभंजनदेव को छप्पन भोग लगाकर कथा विश्रांति पर महाआरती की गई। आयोजन समिति की ओर से कथा वाचक शास्त्री श्री हरिप्रकाशदास स्वामी का नागरिक अभिनंदन किया गया, स्वामीजी ने सभी भक्तजनों को दर्शन लाभ भी प्रदान किया। तीन दिवसीय श्री हनुमान चरित्र कथा के अंतिम तीसरे दिन रात 8 बजे भव्य एवं सुसजित मंच पर श्री कष्टभंजनदेवजी की सुंदर तस्वीर विराजमान कर छप्पन प्रकार के भोग भगवान को अर्पण किए गए। बाद आयोजनसमिति ने श्री कष्टभंजदेवजी की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं धूप-दीप प्रज्जवचलन किया। इस दौरान श्री नीलकंठ भगत एवं उनकी संगीत मंडली द्वारा सामूहिक श्री चालीसा पाठ एवं हनुमान स्तुति की गई। इसी बीच 8.30 बजे कथा स्थल पर सुप्रसिद्ध संत श्री हरिप्रकाशदास स्वामी, श्री किर्तन स्वामी, श्री तीर्थ स्वरूप स्वामी, सरजू भगत, विहान भगत आदि के आगमन पर आयोजन समिति द्वारा जोरदार आगवानी एवं स्वागत किया गया। उपस्थित समस्त श्रद्धालुओं ने अपने स्थान पर खड़े होकर भगवान श्रीराम, श्री स्वामीनारायण एवं श्री कष्टभंजनदेव के सामूहिक जयघोष लगाए। कथा वाचक हरिप्रकाशदास स्वामीजी के मंच पर आते ही सर्वप्रथम आपने श्री कष्टभंजनदेवजी को नमन किया। बाद व्यास पीठ पर विराजमान हुए। कथा के मुख्य बजमान मंजुला गजानंद पुरोहित के साथ पार्थ एवं कुशाग्र सक्सेना तथा अन्य यजमानों ने श्री कष्टभंजन देव की पूजन कर व्यास पीठ पर विराजमान श्रीरामचरितमानस ग्रंथ की भी पूजन कर गुरूदेव के चरणों में नमन किया। इसके बाद मुख्य यजमान एवं लाभार्थी परिवारों के साथ तीसरे दिन अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सांसद गुमानसिंह डामोर, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ओमप्रकाश शर्मा, पूर्व आईएएस अधिकारी सूरज डामोर,भारतीय स्त्री शक्ति की राष्ट्रीय सचिव किरण शर्मा, भाजपा जिला मंत्री आरती भानपूरिया, कित्रर समाज प्रमुख रानी बहन आदि ने श्री कष्टभंजनदेव एवं व्यास पीठ की आरती की। इस दौरान मप्र के खातेगांव से पधारे श्रीराम कथा वाचक अशोक पाठक के आगमन पर उन्हें मंच पर आसीन किया गया, श्री सालंगपुर धाम के संत नीलकंठ भगत द्वारा मंच पर लगी दो भव्य एलईडी पर कथा के दूसरे दिन की प्रमुख झलकियां दिखाने के साथ श्री कष्टभंजनदेव तीर्थ सालंगपुर धाम की वीडियों क्लिीपिंग दिखाई गई। जिसे देखकर उपस्थित श्रोतागणों ने आनंदित होकर श्री कष्टभंजनदेव के जमकर जयघोष लगाए। अतिथियों में सांसद अनीता नगर सिंह चौहान पूर्व सांसद गुमानसिंह डामोर, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ओमप्रकाश शर्मा के साथ आयोजन समिति से वरिष्ठ राकेश झरबड़े, अरूण भावसार, गजेन्द्रसिंह चंद्रावत, दिनेश चौहान, मुकेश नीमा, पल्लूसिंह चौहान, प्रदीप जैन, पवेन्द्रसिंह चौहान, डॉ. लोकेश दवे, पियूष पटेल, तरूण बैरागी, श्यामसुंदर शर्मा, सुभाष गिधवानी, अशोक चौहान, पुष्पेन्द्र नीमा, मीडिया प्रभारी दौलत गोलानी, संतकुमारकुमार चौबे, कपित कुमावत आदि ने व्यास पीठ पर विराजमान स्वामीजी का पुष्पमाला पहनाकर अभिनंदन किया, भगवान करूणा और मन के भाव से प्रसन्न होते हैं अंतिम दिवस कथा की शुरूआत हरिप्रकाशदास स्वामीजी ने स्वामीनारायण भगवान की स्तुति एवं भगवान श्रीराम के जयकारों के साथ की। श्री हरिप्रकाशदास स्वामी ने कहा कि भगवान को धन, दौलत, मोह माया से कोई लेना-देना नहीं होता है, वह तो बस अपने भक्त की आस्था, श्रद्धा, भावना और मन तथा अंतकरण के शुद्ध-पवित्र भाव से प्रसन्न होते है। श्री हनुमानजी महाराज भी ऐसे देवता है, जो अल्प पूजा एवं भक्ति से जल्द ही प्रसन्न हो जाते है और भक्त के सामने सामनेसारे कष्ट और परेशानियों को हर लेते है। वह भगवान श्रीराम की भक्ति में रमते है और हमे उनकी भक्ति में रमकर अपने जीवन को धन्य बनाना है। भगवान के सामने उच्च नीच जात पात का भेद नहीं होता है और ना ही रंग का नहीं गरीबी का अंतर होता है वह तो थोड़ी सी भक्ति से ही ही प्रसन्न होकर मनवांछित फल देते हैं
