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मालव केसरीश्री सौभाग्यमलजी की पुण्यतिथि जप-तप से मनाई गई

मालव केसरीश्री सौभाग्यमलजी की 41वीं पुण्यतिथि जप-तप से मनाई गई

बखतगढ़। मालव केसरी, प्रसिद्ध वक्ता, महाराष्ट्र विभूषणश्री सौभाग्यमलजी की 41वीं पावन पुण्यतिथि श्री वर्धमान स्थानक भवन बखतगढ़ पर जप, तप, त्याग, तपस्या सहित विविध धर्माराधनाओं के साथ उत्साहपूर्वक मनाई गई। मालव केसरीजी वाणी के जादूगर, परस्पर प्रेम एवं भाईचारे के ध्वजवाहक थे। श्रमण संघ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान के लिए मालव केसरीजी को पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। मध्यप्रदेश, राजस्थान व महाराष्ट्र आपके विचरण के प्रमुख क्षेत्र रहे है। वे अपनी देह को साधना आराधना में लगाकर में मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ गए। उनके गुणों को हम भी ग्रहण कर मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ सकते है। तपस्या के प्रत्याख्यान ग्रहण किएवाचनी के बाद उमेश चालीसा की स्तुति की गई। एकासन, बियासन, निवि आदि तपाराधना के प्रत्याख्यान हुए। पश्चात सभी श्रावक श्राविकाओं ने सामूहिक वंदना कर मांगलिक श्रवण करने के बाद भगवान महावीर स्वामी, मालव केसरीजी, आचार्यश्री उमेशमुनिजी, प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी आदि महापुरुषों का जयकारा लगाया।नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप हुएपुण्यतिथि प्रसंग पर दोपहर में 2 से 3 बजे तक श्रीवर्धमान स्थानक भवन बखतगढ़ पर नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप का आयोजन हुआ। इसमें एक स्वर में सभी मंत्रों के राजा नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप कर सौभाग्य चालीसा की स्तुति की। जाप के बाद मांगीलाल डांगी एवं उमरावमल दरड़ा परिवार ने पृथक पृथक प्रभावना वितरण का लाभ लिया।प्रतिदिन नियमित आराधनाएं हो रहीयहां प्रतिदिन प्रातः 9 से 10 बजे तक वाचनी, दोपहर में 2 से 3 बजे तक स्वाध्याय, शाम को 7 : 20 देवसीय प्रतिक्रमण, चौवीसी स्तुति आदि विविध धर्माराधनाएं स्थानक भवन पर हो रही है।—————————————————————————————————————————————-

पूज्यश्री माधवाचार्य जैन परीक्षा के श्रुत ज्ञान महायज्ञ में जिज्ञासु परीक्षार्थियों ने भाग लेकर ज्ञान में अभिवृद्धि कीविभिन्न प्रांतों में श्रेणी 1 से श्रेणी 14 तक की हुई परीक्षा

बखतगढ़। जिनशासन गौरव आचार्यश्री उमेशमुनिजी की दिव्य कृपा एवं धर्मदास गणनायक, प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी एवं संयमी आत्माओं के आशीर्वाद से पूज्यश्री माधवाचार्य जैन परीक्षा मंडल थांदला के तत्वावधान में श्रेणी 1 से श्रेणी 14 तक की वर्ष 2025 की वार्षिक परीक्षा मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि प्रांतों में निर्धारित केंद्रों पर संपन्न हुई। इसमें हर उम्र वर्ग के परीक्षार्थियों ने अभूतपूर्व उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने ज्ञान में अभिवृद्धि की।

बखतगढ़ में यह परीक्षा नव निर्मित श्रीवर्धमान स्थानक भवन पर संपन्न हुई। परीक्षा के बाद विभिन्न प्रांतों के परीक्षा केंद्रों पर जहां पूज्य संयमी आत्माएं वर्षावास हेतु विराजित है, वहां उनसे परीक्षार्थियों ने परीक्षा में पूछे गए प्रश्न एवं उनके उत्तर साझा कर प्रसन्नचित हुए। वहीं जहां चारित्र आत्माओं का चातुर्मास नहीं है वहां संघ के वरिष्ठजनों एवं एक दूसरे से प्रश्न एवं उनके उत्तर साझा किए।साल 2010 से प्रतिवर्ष हो रही है परीक्षाज्ञातव्य है कि आचार्यश्री की पावन प्रेरणा से उक्त परीक्षा का आयोजन श्रेणी 1 से वर्ष 2010 से प्रारंभ हुआ था। तब से लेकर अब तक यह परीक्षा का क्रम प्रतिवर्ष श्रेणी क्रमोन्नति अनुसार निर्बाध रूप से निरंतर गतिमान है। प्रतिवर्ष उक्त परीक्षा का आयोजन चातुर्मास प्रारंभ होने के बाद जुलाई या अगस्त माह में होता है।

इसमें परीक्षार्थी सम्मिलित होकर अपनी ज्ञान आराधना को आगे बढ़ाते है। हर वर्ष ज्ञान आराधक परीक्षार्थियों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। परीक्षा मंडल ने वंचित महानुभावों से श्रुत ज्ञानार्जन के इस महायज्ञ में भाग लेकर अपने इस मनुष्य जीवन को सार्थक करते हुए आगे बढ़ने का आह्वान किया है। परीक्षा मंडल द्वारा परीक्षा में भाग लेने वाले प्रत्येक परीक्षार्थियों को प्रभावना वितरित की गई। प्रथम, द्वितीय, तृतीय उत्तीर्णार्थियों को पुरस्कृत करेंगेप्रत्येक श्रेणी के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा मंडल द्वारा विशेष रुप से पुरस्कृत कर प्रोत्साहित भी किया जाता है। परीक्षा के दौरान पर्यवेक्षक के रूप में अपनी अमूल्य सेवा देने वाले एवं इस वार्षिक परीक्षा में भाग लेकर अपनी ज्ञान आराधना को आगे बढ़ाते हुए अपने समय का सदुपयोग कर श्रुत ज्ञान के इस महायज्ञ को सफल बनाने वाले परीक्षार्थियों को धन्यवाद एवं साधुवाद प्रेषित कर उनके प्रति परीक्षा मंडल ने आभार प्रकट कर कृतज्ञता व्यक्त की।

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