एक कान से सुन दूसरे कान से निकलने का किया काम कुछ ही दिनों में पढ़ाया पाठ भूले मंत्री और सांसद

पार्टी नेताओं के अमर्यादित बयानों पर अंकुश लगाने हेतु भाजपा ने आयोजित किया प्रशिक्षण शिविर
कई दिक्कत नेताओं ने पढ़ाया अनुशासन का पाठ
एक कान से सुन दूसरे कान से निकलने का किया काम
कुछ ही दिनों में पढ़ाया पाठ भूले मंत्री और सांसद
पचमढ़ी में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह ,भूपेंद्र यादव, शिवराज सिंह चौहान ने पार्टी की विचारधारा, अनुशासन का पढ़ाया था पाठ
भोपाल / राजनीतिक संवाददाता
भाजपा की पहचान एक अनुशासित कैंडर आधारित पार्टी के रूप में रही है। अपने नेताओं के अमर्यादित और विवादित बयानों से पार्टी की छवि को हो रहे नुकसान से परेशान भाजपा ने जून में पचमढ़ी में प्रशिक्षण शिविर लगाया था। तीन दिन चले प्रशिक्षण शिविर में पार्टी के दिग्गज नेताओं ने मंत्री, सांसद और विधायकों को पार्टी की विचारधारा, अनुशासन, कार्यशैली और जनसंवाद की मयार्दाओं का पाठ पढ़ाया था।
उन्हें मीडिया से चर्चा में तथ्यों पर आधारित वक्तव्य देने और पार्टी लाइन से अलग हटकर बयानबाजी नहीं करने की नसीहत दी गई थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव समेत संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने मंत्री, सांसद व विधायकों को अपने लंबे राजनीतिक अनुभव के आधार पर प्रशिक्षण दिया था, लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने महीनेभर के अंदर ही वरिष्ठ नेताओं की इन नसीहतों का बिसरा सा दिया है। हाल में सीधी सांसद राजेश मिश्रा, विधायक प्रीतम लोधी समेत कुछ नेताओं के बयानों से तो यही लगता है। वहीं पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के बयान पर भी बवाल हो रहा है।
यूदरअसल, पिछले कुछ वर्षों में मप्र के कुछ भाजपा नेताओं के बयान मीडिया की सुर्खियां बने रहे। पार्टी नेताओं द्वारा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग और संवेदनशील मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी से भाजपा की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा है। इससे विपक्ष को हमले का अवसर मिला है। मई में भारत और पाकिस्तान के बीच बने युद्ध के हालात के दौरान जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए अमर्यादित बयान और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के सेना को लेकर दिए गए विवादित बयान से पार्टी और सरकार बुरी तरह से घिर गई थी। उससे पहले पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पंटेल के बयान ने भी जमकर तूल पकड़ा था।
नेताओं को अनुशासन और मर्यादा का पाठ पढ़ाने के लिए पार्टी ने पचमढ़ी में 14 से 16 जून तक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था। शिविर में नेताओं के विवादित बयानों पर चिंता जताई गई और नेताओं को संयमित भाषा अपनाने की नसीहत दी गई। शिविर में सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ सभी मंत्री, सांसद और विधायक शामिल हुए थे
*प्रशिक्षण शिविर में वरिष्ठ नेताओं ने यह सिख दी थी*
*सार्वजनिक जीवन में भाषा संयमित और मर्यादित हो*
*मीडिया से बातचीत में तथ्यों पर आधारित वक्तव्य दिए जाएं*
*विपक्षी दलों की आलोचना नीतिगत हो, न कि व्यक्तिगत या अपमानजनक समाज के सभी वर्गों के प्रति समभाव और समादर की भावना बनी रहे*
*बार-बार एक ही गलती न की जाए*
*इन नेताओं के बयान हे चर्चा में*
*डिलीवरी की डेट बताओ, उससे पहले उठवा लेंगे* सीधी जिले में सड़क की मांग को लेकर महिला लीला साहू ने वीडियो जारी किया था। लीला ने कहा था कि गांव में सड़क नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को परेशानी हो रही है। 11 जुलाई को भाजपा सांसद राजेश मिश्रा से इस संबंध में जब मीडिया ने सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा था, चिंता की क्या बात है। हमारे पास एंबुलेंस है, अस्पताल है, हर इलाके में आशा कार्यकर्ता हैं। अगर कोई ऐसी बात है, तो आकर अस्पताल में भर्ती हो जाओ। डिलीवरी की एक डेट होती है, उससे पहले उठवा लेंगे। सड़क हम नहीं बनाते, इंजीनियर बनाता है।
*जब तक सड़कें रहेंगी, तब तक गड्ढे होते रहेंगे* लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने 8 जुलाई को भोपाल में मीडिया से चर्चा में कहा था, अभी ऐसी कोई तकनीक नहीं आई है, जिसके आधार पर कह सकें कि ऐसी सड़कें बनाएंगे, जिस पर कभी गड्डा होगा ही नहीं। जब तक सड़कें रहेंगी, तब तक गड्ढे होते रहेंगे। जो कुछ हम कर रहे हैं, प्रयास वही हो सकते हैं। वे मीडिया के सड़कों की खराब हालत और गड्डों के कारण होने वाली दिक्कतों के सवाल का जवाब दे रहे थे।
*कांग्रेस आतंकियों को बिरयानी खिलाने में व्यस्त* उज्जैन में सावन के प्रत्येक सोमवार को स्कूलों में अवकाश के आदेश को लेकर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के बयान पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा भड़क गए थे। नौ जुलाई को उन्होंने कहा था, कांग्रेस केवल आतंकवादियों को बिरयानी खिलाने में व्यस्त रहती है। इसके लोग विदेशी चमचागिरी करते रहते हैं। पता नहीं ये कांग्रेस चीन की है या पाकिस्तान की है। कलेक्टर के पास अधिकार होता है कि वो आवश्यकता अनुसार छुट्टी घोषित कर सकता है।
