
*होली पर वंश वृद्धि के लिए सिरवी समाज में अनोखी ढूंढो परम्परा
एक्टिव*ग्रुप महिला मंडल ने प्राकृतिक रंगों से होली खेलने का संदेश दिया
बड़वानी( नरेन्द्र गुप्ता)
सेगवा गांव में सामाजिक हिंदू अनुष्ठान रूप में जो बच्चे के जीवन की पहली होली मनाने के लिए किया जाता है नवबीजात बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं वंशवृद्धि के लिए सामाजिक ढूंढ परम्परा चली आ रही है जो आज भी जारी है होली के रंग पंचमी पर इस दिन कई घरों में क्षत्रिय सिर्वी समाज सेगांव के लोग ढूंढ परम्परा का आज भी निर्वहन कर रहे है.नवजात शिशु को गोद में लेकर गद्दे पर बिठाया जाता हैं और गीत गाकर ढूंढ की जाती हैं एवं समाजन, बच्चों द्वारा लकड़ी बजाते हैं, जिससे माना जाता है कि बच्चे का भय दूर होता है और वह शोर-शराबे से नहीं डरता.पूर्वजों के मुताबिक,नकारात्मक ऊर्जा को मिटाने, टोने टोटके, काले जादू जैसे अंधविश्वासों से मुक्ति के लिए सिर्वी समाज में सदियों पहले ढूंढ परंपरा शुरू की गई. ढूंढ अलग-अलग गावों में अलग-अलग तरह की शब्दावली का इस्तेमाल करते है बहुत सौ का अमर ढूंढ भी होता है. इस रस्म को ढूंढोत्सव भी कहते हैं. यह सिर्वी समाज में बहुत महत्वपूर्ण है.।

*रंगो*से सराबोर पूरा शहर* केशव फाग यात्रा पुरा शहर रंगों से सराबोर हुआ वहीं वहीं एक्टिव ग्रुप द्वारा जलसा गार्डन मेराधा कृष्ण बन फाग उत्सव मनाया। इसके माध्यम से समाज में हर्बल रंगों से होली खेलने का संदेश दिया एक्टिव ग्रुप की महिला मंडली ने जहां प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर राधा कृष्ण फाग में फूलों की वर्षा कर पलाश के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर , आमजनों को कास्मेटिक रंगों होने वाले दुष्परिणाम से अवगत कराने का प्रयास किया।
इस ग्रुप की प्रमुख श्रीमती संगीता लोह ने बताया की एक्टिव ग्रुप महिला मंडल समय-समय पर समाज में जागरूकता लाने के लिए अपना प्रयास करता रहता है ।वही नगर में विभिन्न समाज जनों ने अपने-अपने समाज में रंग उत्सव के कार्यक्रम आयोजित किये। फाग उत्सव के पश्चात समाज जनों गुड़दालिये की प्रसादी का वितरण भी किया

