
बदनावर! संगीतकार की जिव्हा पर साक्षात मां सरस्वती का वास होता है तभी वह देश ओर दुनिया में अपनी कला के माध्यम से पहचाना जाता हे संगीत एक ऐसी कला हे जिसमें कलाकार अपने सुर और ताल के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त करता हैं वहीं प्रसिद्धि और कामयाबी आज प्राप्त की अपनी अदभुत संगीत साधना से संगीत सम्राट भाई दीपक करणपुरिया ने उक्त उदगार संगीत सम्राट दीपक करण पुरिया के मेवाड़ गौरव पद से अलंकृत होने पर सम्मान समारोह में अखिल भारतीय श्री जैन श्वेताम्बर मालवा महासंघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी राजेंद्र बोकाडिया द्वारा व्यक्त किए आपके द्वारा बताया कि करणपुरिया को संगीत विरासत में मिला किंतु देश और दुनिया में प्रसिद्धि दिलवाई अपनी वाणी के जादू से करणपुरिया अपनी संगीत कला के माध्यम से भक्ति आराधना के साथ साथ मंदिरों में होने वाले अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव में संगीत के माध्यम से भक्ति आराधना एवं चढ़ावे का कार्य लगन से पूर्ण करवाते है वर्तमान में राजपुरा तीर्थ पर आयोजित अंजनशलाका महोत्सव में परम पूज्य आचार्य श्री रत्नसेन सुरीश्वरजी म सा मालव रत्न श्री पद्म भूषणरत्न सुरीश्वरजी महाराजा परम् पूज्य मेवाड़ रत्न निपूर्णरत्न सुरीश्वरजी महाराजा 70 से अधिक साधू साध्वी जी भगवन्तों की उपस्थिति में राजपुरा तीर्थ के सस्थापक श्री कमलेश जी जारोली द्वारा संगीत सम्राट दीपक करण पुरिया को मेवाड़ गौरव की उपाधि से सम्मानित किया गया आपके द्वारा बताया गया कि दीपक करण पुरिया का सम्मान न केवल उनकी संगीत साधना का गौरव हे बल्कि यह मेवाड़ की सांस्कृतिक पहचान ओर उनकी धार्मिक विरासत का बहुमान हे करण पुरिया के बदनावर आगमन पर मालवा महासंघ राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष मेहता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेन्द्र सुन्देचा राजेन्द्र संगीता बोकाडिया एवं पदाधिकारियों द्वारा बहुमान किया गया



