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नगर पालिका प्रशासन​समस्या का स्थाई निराकरण करने के बजाय शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने में जुटा अमला, आम जनता भुगतेगी खामियाजा*

​परियोजना पर प्रशासन का ‘कब्जा’: रसूखदारों की चारदीवारी के सामने नतमस्तक हुआ

बड़वानी नगर पालिका प्रशासन
​समस्या का स्थाई निराकरण करने के बजाय शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने में जुटा अमला, आम जनता भुगतेगी खामियाजा*


​बड़वानी( नरेन्द्र गुप्ता):- शासन की महत्वाकांक्षी योजनाएं किस तरह प्रशासनिक रसूख और जिम्मेदार अधिकारियों की हठधर्मिता की भेंट चढ़ जाती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण जिला मुख्यालय बड़वानी में देखने को मिल रहा है। नगर पालिका बड़वानी द्वारा विजय स्तंभ चौराहा से लेकर सरस्वती नेत्र चिकित्सालय तक लगभग 10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से मार्ग विभाजक (डिवाइडर) सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस निर्माण कार्य में नियमों को ताक पर रखकर विस्तृत परियोजना प्रपत्र (DPR) का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन किया जा रहा है।


खुद के भवन पर चला हथौड़ा, पर ‘साहबों’ के सामने नतमस्तक
​परियोजना के अनुसार सड़क को चौड़ा करने और फुटपाथ निर्माण के लिए मार्ग में आने वाली चारदीवारियों को हटाया जाना था। नगर पालिका परिषद ने मुस्तैदी दिखाते हुए अपने स्वयं के भवन की चारदीवारी को तो ढहा दिया, लेकिन जब बात जिला प्रशासन के आला अफसरों की आई, तो नपा के कदम पीछे खिंच गए। वर्तमान में स्थिति यह है कि मार्ग में बाधक बन रहे माननीय न्यायाधीश निवास, लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला कलेक्टर बंगले की चारदीवारी को छुआ तक नहीं गया है।


​शहर में यह चर्चा आम है कि नगर पालिका परिषद और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) श्रीमती सोनाली शर्मा में इतना साहस नहीं है कि वे जिला कलेक्टर, जिला न्यायाधीश और पीडब्ल्यूडी जैसे रसूखदार विभागों की चारदीवारियों पर कार्रवाई कर सकें। नतीजतन, रसूखदारों को बचाने के लिए पूरी परियोजना के नक्शे और स्वरूप से ही समझौता किया जा रहा है।
​पुराना पैंतरा: शिकायतों का निराकरण नहीं, बंद कराने का खेल
​यह पहला मौका नहीं है जब इस अव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठी हो। पूर्व में इस गंभीर विषय को लेकर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत द्वारा उग्र रूप से ज्ञापन सौंपा गया था। यही नहीं, संगठन के अध्यक्ष बालकृष्ण सोनगरा ने इस संबंध में सीएम हेल्पलाइन पर बाकायदा शिकायत भी दर्ज करवाई थी। लेकिन आरोप हैं कि जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने पद और रसूख का दुरुपयोग करते हुए, शिकायतकर्ता पर दबाव बनाकर उस शिकायत को बंद करवा दिया था।
​समस्या जस की तस, दबाव भरपूर
विडंबना देखिए कि नगर पालिका प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जनता की मूलभूत समस्या का कोई स्थाई निराकरण करने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। इसके विपरीत, अपनी कमियों को छुपाने के लिए पूरा तंत्र शिकायतकर्ताओं पर ही दबाव बनाने में जुट जाता है ताकि किसी भी तरह सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज मामलों को बंद कराया जा सके। जनहित के मुद्दों को सुलझाने के बजाय उन्हें दबाने का यह खेल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
​नागरिकों ने फिर खोला मोर्चा, CM हेल्पलाइन पर मामला दर्ज
​प्रशासनिक दबाव के बाद भी बड़वानी के नागरिकों का हौसला डगमगाया नहीं है। क्षेत्र के जागरूक नागरिक धर्मेन्द्र केवट ने एक बार फिर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (शिकायत क्रमांक: 38265654) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विस्तृत परियोजना प्रपत्र (DPR) के अनुरूप ही फुटपाथ का निर्माण करवाया जाए और रसूखदारों की चारदीवारियों को तत्काल हटाया जाए। वर्तमान में यह शिकायत नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधीन ओपन स्थिति में है।
​जनता भुगतेगी रसूखदारी का खामियाजा
​10 करोड़ की योजना यदि बिना फुटपाथ और बिना उचित चौड़ीकरण के अधूरी छोड़ दी जाती है, तो इसका सीधा खामियाजा बड़वानी नगर के आम नागरिकों को भुगतना पड़ेगा। संकरे मार्ग के कारण भविष्य में दुर्घटनाओं का अंदेसा बढ़ेगा और फुटपाथ न होने से पैदल यात्रियों को जान जोखिम में डालकर चलना पड़ेगा। अब देखना यह है कि क्या प्रदेश सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर जिला प्रशासन के इन ‘बाधक’ अधिकारियों पर नकेल कसती है और समस्या का कोई स्थाई समाधान निकालती है, या फिर बड़वानी की जनता को इस वीआईपी कल्चर का शिकार होना पड़ेगा

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