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जैन संत श्री 1008 शीतलराज मुनिजी महाराज का महामांगलिक सम्पन्न

जैन संत श्री 1008 शीतलराज मुनिजी महाराज का महामांगलिक का आयोजन सम्पन्न हुआ।

बड़वाह – जैन जगत के महान आध्यात्मयोगी, अखंड बालब्रम्हचारी, इतिहास मार्तंड आचार्य प्रचार 1008 श्री हस्तीमलजी महाराज के सुशिष्य वचन सिद्धि के धारक, प्रणाम तपस्वी महान साधक पूज्य गुरूदेव श्री 1008 शीतलराज मुनिजी महाराज का आध्यात्मिक प्रवास चल रहा है। उनके सान्निध्य में जैन समाजजनों के साथ-साथ आमजन भी बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव से जुड़ रहे हैं। प्रवास के दौरान संत श्री द्वारा महामांगलिक आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें प्रतिदिन भक्तों की बढ़ती उपस्थिति देखी जा रही है।10 दिसम्बर बुधवार को महामांगलिक लाभार्थी अभयकुमार लुंकड परिवार को मिला था।वही गुरुवार को महामांगलिक के लाभार्थी विजयकुमार प्रेमचंद पगारिया के द्वारा बस स्टेंड स्थित बाफना धर्मशाला, बड़वाह में रखा गया था।कार्यक्रम का संचालन विनय लुणावत के द्वारा किया गया तथा आभार विजय पगारिया ने माना

सार्वजनिक महामांगलिक 13 दिसम्बर शनिवार को नगरपालिका परिसर में होगी

प्रसून दस्सानी,नवरतनमल जैन बताया कि पूज्य गुरूदेव श्री शीतलराज जी महाराज का इन दिनों बड़वाह शहर में प्रवास होने से जैन समाज ही नहीं पूरे बड़‌वाह शहर में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना हुआ है। प्रतिदिन ध्यान के बाद होने वाली आपकी संकट निवारक कल्याणकारी महामांगलिक श्रवण करने शहर में जनसैलाब उमड़ रहा है। 12 दिसम्बर को श्वेताम्बर श्री सघ बड़वाह अध्यक्ष प्रेमचंद खिंवसरा परिवार
13 दिसम्बर को नपाअध्यक्ष राकेश गुप्ता के अनुरोध पर नगरपालिका परिसर में सार्वजनिक महामांगलिक एवं 14 दिसम्बर को ईश्वरचंद प्रसून कुमार दस्साणी परिवार को मिलने जा रहा है।इस अवसर पर विमलचंद छाजेड राजेंद्र रोकड़िया
सुशील छाजेड ईश्वरचन्द दसानी अशोक जैन बाग़ोद दिलीप भंडारी विमल जैन सतीश जैन जितेंद्र सुराणा रमेश रोकड़िया
पवन पारख सहित समस्त मंडल के श्रावक श्राविका उपस्थित थे।

करही, बागोद होते हुये इन्दौर की ओर होगा प्रस्थान-

बड़‌वाह प्रवास के बाद पूज्य गुरुदेव का मंगल विहार पीपल्या बुजुर्ग, करही, बागोद होते हुए इन्दौर की ओर होगा। इन्दौर के बाद विभिन्न क्षेत्रों को पावन करते हुए गुरूदेव आगामी चातुर्मास के लिये शाजापुर पधारेगें

1970 में संत श्री ने जैन दीक्षा लेकर तपस्या में जीवन समर्पित किया —

उल्लेखनीय ही कि श्वेतांबर स्थानकवासी संत 1008 शीतलराज मुनिजी का 1948 में राजस्थान के जोधपुर में जन्म हुआ । जिसके बाद सन 1970 में जैन दीक्षा लेकर तपस्या में उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया। अपनी कठोर तपस्या, 52 वर्षों से शयन त्याग, अखंड मौन व्रत,आतपन साधना और भारत भर में पैदल विहार के माध्यम से अहिंसा, शांति और संयम का संदेश देते हैं।मुनिश्री चतुर्मास के बाद बैतूल से विहार के बाद अगले चातुर्मास के लिए शाजापुर जा रहे है।इस बीच 4 दिसम्बर से वे बड़वाह में है।

पूज्य गुरूदेव की कल्याणकारी महामांगलिक का लाभ जरूर उठाये।

राकेश गुप्ता ने बताया कि परम पूज्य गुरूदेव ने पूरे बड़वाह शहर के नागरिकों के लिये आगामी 13 दिसम्बर शनिवार को दोपहर में 3 बजे महामांगलिक प्रदान करने की स्वीकृति प्रदान की है। नपा अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने नगरवासियों से अपील की है कि समस्त नगरवासी अपने परिवार के साथ पूज्य गुरूदेव की कल्याणकारी महामांगलिक का लाभ जरूर उठाये। उन्होने बड़वाह शहर के जनकल्याण हेतु सावजनिक मांगलिक का अवसर प्रदान करने के लिये कृतज्ञता भी व्यक्त की।

पाट या कुर्सी पर बिराजमान होकर ही रात दिन आपकी साधना अनवरत रूप से चल रही है।

विवेक जैन ने बताया कि परम पूज्य श्री शीतलराज जी महाराज ने संयमग्रहण करने के बाद 50 वर्षों से आपने जमीन पर लेटकर एक मिनिट की भी नींद नही निकाली। पाट या कुर्सी पर बिराजमान होकर ही रात दिन आपकी साधना अनवरत रूप से चल रही है। इसीलिये उनकी साधनामयी महामांगलिक श्रवण करने की लालसा भक्तजनों में रहती है।

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