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करोड़ों की लागत से बना शासकीय भवन 2 साल से बंद – एनएसयूआई ने उठाई आवाज़

करोड़ों की लागत से बना मेढ़ीमाता का शासकीय भवन 2 साल से बंद – एनएसयूआई ने उठाई आवाज़
बड़वानी (नरेन्द्र गुप्ता)।जनता के टैक्स के पैसे से करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए शासकीय भवनों की वास्तविक तस्वीर अब सामने आने लगी है। मेढ़ीमाता क्षेत्र में स्कूल भवन के नाम पर बना यह शासकीय भवन निर्माण के तीन साल बाद भी बंद पड़ा है। हालात इतने खराब हैं कि भवन के अंदर अब बकरियां बंधी हैं और चारों ओर गंदगी व झाड़ियां फैली हुई हैं। यह नज़ारा सिर्फ लापरवाही ही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और संसाधनों की बर्बादी की ओर भी इशारा करता है।
करोड़ों की लागत, लेकिन उपयोग शून्य
ग्रामीणों के अनुसार इस भवन के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। काम पूरा होने के बाद भी भवन को छात्रों के उपयोग में नहीं लाया गया। न कोई कक्षा शुरू हुई, न कोई प्रशासनिक गतिविधि। भवन का ढांचा तैयार है, लेकिन जगह-जगह सीलन, टूटी टाइलें, अधूरी मरम्मत और झाड़ियां इसकी दुर्दशा की कहानी कहती हैं।
भवन का निरीक्षण – एनएसयूआई छात्र नेताओं ने उठाई आवाज़
एनएसयूआई छात्र संगठन बड़वानी के छात्र नेता बादल गिरासे, अंकित निंगवाल और संदीप पवार ने भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान भवन के अंदर बकरियां बंधी हुई मिलीं। छात्र नेताओं ने मौके पर ग्रामीणों से चर्चा की तो ग्रामीणों ने बताया कि भवन बनकर तैयार तो हो गया है लेकिन काम घटिया किया गया और घोटाला हुआ था। यही कारण है कि यह भवन चालू नहीं हो पाया।
बादल गिरासे ने कहा, “यह जनता के टैक्स के पैसे का सीधा दुरुपयोग है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी भवन छात्रों के किसी काम का नहीं है। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
घटिया निर्माण और घोटाले के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में भारी गड़बड़ी हुई है। ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों ने घटिया सामग्री का उपयोग किया। परिणामस्वरूप, भवन की दीवारों में दरारें हैं और सीलन ने इसे जर्जर बना दिया है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि निर्माण के बाद से प्रशासन ने न तो नियमित निरीक्षण किया और न ही इसे चालू करने की कोई पहल की।
शिक्षा पर पड़ रहा असर
इस भवन के चालू न होने का सीधा असर मेढ़ीमाता क्षेत्र के बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चों को या तो पुराने जर्जर स्कूलों में पढ़ना पड़ता है या फिर दूरदराज़ के गांवों में जाना पड़ता है। यह स्थिति न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित कर रही है बल्कि अभिभावकों के लिए भी चिंता का कारण है।
एनएसयूआई नेताओं ने कहा कि अगर यह भवन समय पर चालू हो जाता तो यहां आधुनिक कक्षाएं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और खेलकूद की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती थीं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को शहरों जैसी सुविधाएं मिल पातीं।
एनएसयूआई की मांग – उच्च स्तरीय जांच और तत्काल कार्रवाई
एनएसयूआई छात्र संगठन बड़वानी ने मांग की है कि इस भवन की उच्च स्तरीय जांच हो। घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही भवन की मरम्मत कराकर इसे तुरंत छात्रों के उपयोग में लाया जाए।
बादल गिरासे ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द ही कार्रवाई नहीं की, तो एनएसयूआई छात्र संगठन व्यापक आंदोलन करेगा। “हम चुप नहीं बैठेंगे। यह जनता के टैक्स के पैसे का मामला है। हमारा संगठन तब तक संघर्ष करेगा जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और भवन चालू नहीं हो जाता।”
प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
अब तक इस मामले में न तो किसी अधिकारी ने सार्वजनिक बयान दिया है और न ही स्थल पर जाकर स्थिति देखी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। प्रशासन की यह चुप्पी सवाल खड़े करती है कि आखिर क्यों तैयार भवन को चालू करने में इतनी देरी हो रही है।
जनता के पैसे की बर्बादी
यह मामला सिर्फ एक भवन का नहीं है बल्कि सरकारी योजनाओं और जनता के पैसे की जवाबदेही का है। करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन का उपयोग अगर सही ढंग से नहीं होता, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान गरीब और ग्रामीण वर्ग को होता है। मेढ़ीमाता का यह भवन इस बात का ज्वलंत उदाहरण है।
स्थानीय लोगों की आवाज़ – “अब कार्रवाई जरूरी”
ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार इस मामले में त्वरित कार्रवाई करे। उनका कहना है कि यह भवन चालू होने से हजारों बच्चों को पढ़ाई की सुविधा मिल सकती है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए ताकि भविष्य में कोई अधिकारी या ठेकेदार जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ न कर सके।
एनएसयूआई ने तय की रणनीति
एनएसयूआई छात्र संगठन बड़वानी ने तय किया है कि आने वाले समय में वे इस मुद्दे पर धरना प्रदर्शन, रैली और ज्ञापन जैसे कार्यक्रम करेंगे। संगठन का कहना है कि यह मामला सिर्फ मेढ़ीमाता तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के कई हिस्सों में बने ऐसे भवन हैं जो वर्षों से बंद पड़े हैं। संगठन इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगा।
क्या कहता है यह मामला?
मेढ़ीमाता का यह भवन इस बात का प्रतीक है कि योजनाएं कागजों में और धरातल पर किस तरह अलग-अलग दिखती हैं। जनता के टैक्स के पैसे से बनी सुविधाएं जब जनता तक नहीं पहुंचतीं तो लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठता है।
मेढ़ीमाता का स्कूल भवन भ्रष्टाचार, लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता की एक बड़ी मिसाल बन गया है। एनएसयूआई छात्र संगठन बड़वानी ने इस मुद्दे को जनता के सामने लाकर यह साफ कर दिया है कि वे सिर्फ छात्रों के मुद्दों तक सीमित नहीं हैं बल्कि जनता के टैक्स के पैसे की भी निगरानी कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन कब जागेगा और कब यह भवन अपने वास्तविक उद्देश्य—छात्रों की पढ़ाई और विकास—के लिए चालू होगा।

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