Sun. Mar 8th, 2026

24 कैरेट सोना जैसे भाजपा के कार्यकर्ता थे खेमराजजी पाटीदार

पूर्व विधायक खेमराजजी पाटीदार को श्रृद्वांजली

भाजपा के 24 कैरेट सोना जैसे कार्यकर्ता थे खेमराजजी पाटीदार

दादा ने पुरा जीवन भाजपा को ही सर्मपित कर दिया

विपरीत परिस्थितियों मे भी भाजपा का दामन नहीं छोडा

भाजपा के अलावा किसी अन्य पार्टी की और ध्यान नहीं दिया

बदनावर/महेश पाटीदार। मप्र की राजनीति में जितने भी लोग बदनावर विधानसभा के बारे में जानते है, या संबंध रखते है। वे सभी लोग खेमराजजी पाटीदार दादा के नाम से भली भांति परिचित है। बदनावर की राजनीति में जितने राजनेता है उनमे दादा की अपनी अलग पहचान थी। वर्तमान में भाजपा में नेताओं व कार्यकर्ताओं के पास संसाधनों की भरमार है, किंतु एक समय ऐसा भी था जब भाजपा के नेताओं के पास मोटर साइकल भी नहीं थीं। तथा भाजपा की राजनीती घाटे का सौदा हुआ करती थी। विकट परिस्थितियों में खेमराज दादा ने अपने जीवन का लक्ष्य भाजपा को बनाया। किसान परिवार के होने के कारण राजनीती मंे पर्दापण के साथ ही अपनी छाप छोडते हुए सरपंच, जनपद सदस्य व विधायक जैसे पदांे पर काबिज हुए। पाटीदार समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए राजनीती में अपनी पैठ बनायी।

भाजपा के अलावा किसी अन्य पार्टी की और ध्यान नहीं दिया-खेमराज दादा ने जब से भाजपा को अपनाया, अन्य पार्टी की और ध्यान नहीं दिया। दादा उमा भारती के करीबी होने के बावजुद उनकी जनशक्ति पार्टी से दुरियां बनाकर भाजपा के कमल के फुल के साथ खडे दिखायी दिए। इससे प्रतीत होता है कि वे कोई साधारण बुद्वि के राजनैतिक व्यक्ति नहीं थे। यह बात भाजपा के वरिश्ठ नेता भलीभांति जानते थे।

क्षेत्र में भाजपा के अलावा कभी दूसरे दल की और ध्यान ही नहीं देकर पुरा जीवन भाजपा को ही सर्मपित कर दिया।

विपरीत परिस्थितियों मे भाजपा का दामन नहीं छोडा- खेमराज दादा ने विपरीत परिस्थिितियों मंे भी भाजपा का दामन नहीं छोडा। पूर्व विधायक रमेशचंदसिंह गट्टू बना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भाजपा को मजबूती देने का काम करते रहे। भाजपा ने उन्हे विधानसभा चुनाव में तीन बार मोका दिया। जिसमें 1998 में आप विधायक चुने गए। किंतु 2003 एवं 2008 में गुटीय राजनीती का शिकार होने से सफलता नहीं मिली। चुनाव में असफलता के बावजुद उन्होने सभी नेताओं को साथ लेकर क्षेत्र में विकास का परचम लहराया।

स्वार्थ की राजनीती से दूर रहे खेमराज दादा-बदनावर की राजनीती में दादा स्थानीय होने के बावजुद स्वार्थ की राजनीती से दूर रहे। पद की लालसा में प्रकाश सांवत एवं राजेश अग्रवाल भी भाजपा से विद्रोह कर निर्दलिय चुनाव लडे। किंतु दादा ने हमेशा से ही भाजपा का साथ दिया। 2013 में पार्टी के वरिश्ठों ने इन्ही ही सहमती से इंदौरी नेता भंवरसिंह शेखावत को बदनावर से प्रत्याशी बनाया गया। स्थानीय कुछ नेताओं ने तो शेखावत का पुतला जलाकर विरोध भी किया। किंतु दादा ने ही इमानदारी से पार्टी का काम कर शेखावत को विधायक बनाया। दादा के अलावा सभी नेताओं पर कहीं न कहीं विरोध करने का आरोप लगा है।

अंत में खेमराज दादा को लेेकर यही कहा जा सकता है कि वे भाजपा के 24 कैरेट सोना जैसे कार्यकर्ता थे। और अंतिम समय तक भाजपा के ही रहे। तथा खेमराज दादा ही ऐसे नेता थें जिस पर आंख बंद कर सभीvarist नेता भरोसा करते थे!

Related Post