विद्यार्थियों का जीवन खतरे में डाल बिठाया गया हॉस्टल के समान के साथ

बदनावर! आदिवासी बालक छात्रावास नवीन भवन भाईंदा फांटे पर शिफ्ट किया जा रहा है किंतु मजदूरों की बजाय बच्चों से काम करवाया जा रहा है तथा जो नोनिहलो की जान जोखिम में डालकर उन्हें फर्नीचर व अन्य सामग्री के साथ ट्राली में बिठाकर ले जाया जा रहा है पूरे घटनाक्रम का वीडियो प्रस्तुत है छात्रावास अधीक्षक को जो नोनिहालों की जान से खिलवाड़ करने का अधिकार किसने दिया!
उक्त वीडियो 20 जुलाई रविवार का होकर ; दोपहर 12 बजे के करीब शूट किया गया है ।
विडियो नवनिर्मित बालक होस्टल कानवन (भोइंदा फाटे ) का है ।
जिसमे आपको एक ट्रॉली दिखाई दे रही है , जिस पर होस्टल के बच्चो की सामग्री जैसे बर्तन,फर्नीचर,बिस्तर व अन्य सामग्री लदी हुई है ।
बच्चे अपने नवीन होस्टल में शिफ्ट हो रहे है ।
सामग्री के आसपास बच्चे खड़े नजर आ रहे है ।
इस दृश्य को हमने अपनी आंखो से देखा और गलत लगा तो इसका वीडियो बना लिया ।
हर किसी को अपने बच्चे प्यारे होते है यह बात जिम्मेदार क्यों नहीं समझते है ।
मजदूरों का कार्य नोनिहालो के भरोसे करवाया जा रहा है और साथ में कोई जिम्मेदार भी नजर नहीं आ रहा है ।
अपने कर्तव्य की इतश्री दूसरो शेयर की जा रही है क्या यह सही है ।
कुछ सवाल जिम्मेदारो से…
🎯बच्चो की रविवार की छुट्टी को यू जाया करना कहां तक सही है ।
🎯क्या जिम्मेदारो ने सामग्री शिफ्टिंग का कोई प्लान नही बनाया ।
🎯क्या शासन सामग्री शिफ्टिंग में आने वाले खर्चे के बिल पास नहीं करता ?
🎯तो फिर भारी ट्रैफिक और डेंजर जोन (कई दुर्घटना हो चुकी है) क्रासिंग पर बच्चो की जान को जोखिम में क्यों डाला गया ?
🎯बच्चो से किसी भी तरह का श्रम करवाना अपराध है ।
फिर भी सामग्री के सहारे उन्हें टंगवा दिया।
🎯यदि जिम्मेदारो को मजदूर नही मिले तो वह कार्य क्या बच्चो से करवा सकते है ?
🎯बच्चो को सामग्री संग भारी ट्राफिक (चालू रोड) पर इस तरह सफर तय क्यों करवाया गया ?
🎯क्या बच्चो को नए भवन में शिफ्टिंग की यह तस्वीर पीड़ादायक नही है ?
शासन द्वारा बच्चो के नवीन सत्र आरंभ पर सभी विद्यालय में “शाला प्रवेश उत्सव” मनाया जाता है ,जहा बच्चो का स्वागत पुष्प वर्षा ,तिलक और टॉफी दे कर किया जाता है ।
अखबार में खूब सुर्खियां भी बटोरी जाति है ।
तो फिर इन बच्चो के नवीन भवन जिसकी उन्हें लंबे अरसे से आस थी उसका प्रवेश इतना धूमिल क्यों ?

