Mon. Mar 9th, 2026

भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा, आदिवासी समाज ने भीलप्रदेश बनाने की मांग की

*भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा सर्व आदिवासी समाज द्वारा तहसीलदार महोदय को राष्ट्रपति के नाम भीलप्रदेश राज्य बनाने को लेकर सोफा ज्ञापन

बदनावर! भारत के आदिवासी समुदाय से जुड़े ज्वलंत मुद्दे एवं संविधान के अनुच्छेद 3 (क, ख, ग, घ, ङ) के तहत् चार राज्यों का सीमाई इलाका एवं एक केन्द्र शासित प्रदेश को जोड़कर ‘भीलप्रदेश राज्य गठन किए जाने के संबंध में तहसीलदार सुरेश नागर को भीलप्रदेश मुक्ति मोर्चा सर्व आदिवासी समाज द्वारा राष्ट्रपति के नाम सोपा गया ज्ञापन जिसमें उल्लेख है भारतीय उपमहाद्वीप में 20 लाख साल पहले से रह रहे आखेटक खाध्य संग्राहक मानव समूह के वंशज आदिवासी है।” पुरातात्विक स्थल विन्ध्याचल-सातपुडा अरावली पर्वतमाला में क्रमशः बेलन नदी घाटी, भीमबेटका एवं साबरमती नदी बेसिन में मिले है।

भारत की इस मूल संस्कृति मानव समूह के संरक्षण के लिए ‘भीलप्रदेश राज्य’ गठन आवश्यक है। इतिहासकाल में अप्रवासी (Immigrants) यहूदी, यूनानी, ईरानी, मुस्लिम, ईसाई धर्मी लोगों की बसावट हुई। इस कारण से भारत की मूल संस्कृति, सभ्यता, बोली, धर्म के अस्तित्व की सुरक्षार्थ भील सांस्कृतिक भाषाई ऐतिहासिक क्षेत्र को जोड़कर ‘भीलप्रदेश राज्य’ गठन होना चाहिए था, मगर आजादी के बाद नहीं हुआ और चार राज्यों में पूरा इलाका बांट दिया गया। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश की विधानसभाओं में ‘भीलप्रदेश राज्य’ का प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भिजवाया जाए। उपस्थित प्रदेश समर्थक विक्रम सोलंकी भारत आदिवासी पार्टी बाप राष्ट्रीय सदस्य जितेंद्र मुनिया भारत आदिवासी पार्टी बाप लोकसभा प्रत्याशी धार महू लोकसभा दिलीप भूरिया भारत आदिवासी पार्टी तहसील अध्यक्ष मोहनलाल जी कटारिया जितेंद्र चौहान अंबाराम बिलावल कन्हैयालाल वसुनिया दिलीप भूरिया धर्मेंद्र बघेल मदन भूरिया बाला मोरी गोविंद डामर नंदराम जी भूरिया दिलीप निनामा (जनपद सदस्य)मनोहर मकवाना राधेश्याम मंडलोई नंदराम वसुनिया भेरूलाल वसुनिया संतोष मुनिया जयंतीलाल मेहरा प्रकाश वसुनिया जी निलेश धर्मेंद्र वाघेला डिंडोर नंदराम वसुनिया जितेंद्र गिरवाल गोविंद नरसिंह दिलीप सोनू ,जितेंद्र मेडा रितेश देवदा अजय गामड़ मिडिया प्रभारी ज्ञापन का वाचन राजकुमार चौहान ने करा

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