चातुर्मास के प्रथम दिवस से उपासक दशांग सूत्र का किया वाचन प्रारंभ

बखतगढ़। जिनशासन गौरव, आचार्यश्री उमेशमुनिजी के शिष्य धर्मदास गणनायक प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी की प्रेरणा रहती है कि जहां किसी भी संघ में संत सतियांजी का वर्षावास नहीं है उन संघों में चातुर्मास प्रारंभ दिवस से ही आगम या आचार्य भगवन के साहित्य का वाचन करना चाहिए। इसी के मद्देनजर धर्मदास गण परिषद एवं चातुर्मास के पूर्व बखतगढ़ पधारे साध्वीश्री समीक्षणाश्रीजी, बखतगढ़ गौरवश्री स्तुतिश्रीजी एवं श्री अरुणिमाश्रीजी ठाणा 3 की प्रेरणा से श्री वर्धमान स्थानक भवन बखतगढ़ में उपासक दशांग सूत्र का वाचन प्रारंभ हुआ। चातुर्मास के प्रथम दिवस को उक्त शास्त्र का वाचन श्राविका पुष्पा मोदी ने किया। श्रावक श्राविकाओं ने एकाग्रतापूर्वक साहित्य का श्रवण किया। आचार्य उमेश चालीसा एवं गुरु गुणगान स्तुति भी की गई। वर्षावास प्रारंभ चौमासी पक्खी पर्व दिवस एवं गुरु पूर्णिमा तप, त्याग के साथ विभिन्न धर्म आराधना आदि से मनाया गया। इस अवसर पर एकासन, उपवास आदि तपाराधना हुई। वरिष्ठ श्राविका झमुबाई दरड़ा ने सभी को मांगलिक श्रवण करवाई। धर्मसभा का संचालन बखतगढ़ गौरव साध्वीश्री धैर्यप्रभाजी के सांसारिक भाई वर्धमान बोहरा ने किया। शाम को चौमासी पक्खी पर्व के प्रतिक्रमण का आयोजन हुआ। नवीन स्थानक भवन में श्राविका वर्ग ने एवं पुराने स्थानक भवन में श्रावक वर्ग ने प्रतिक्रमण कर चौरासी लाख जीवायोनी से मिच्छामि दुक्कड़म कर एक दूसरे से खमत खमावणा करके सामूहिक चौवीसी स्तुति की। इधर बखतगढ़ के ही तेरा पंथ भवन में 10 जुलाई से ही एवं जैन उपाश्रय पौषध शाला भवन में एक दिन 9 जुलाई से वर्षावास प्रारंभ हुआ। इसी के साथ दोनों धर्म स्थान पर भी तप, त्याग, धर्म, ध्यान आदि आराधना का दौर प्रारंभ हो गया है। आराधक अपनी शक्ति अनुसार छोटी बड़ी आराधना में रमण करने लगे है।
संलग्न चित्र : बखतगढ़ 10 जुला

