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ओबीसी आरक्षण को लेकर भाजपा, कांग्रेस आमने-सामने बयानो का दोर जारी

ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने के मामले में भाजपा कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक दल द्वारा केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए बयान बाजी की जा रही है ! भाजपा सरकार में होने के बावजूद 27 प्रतिशत आरक्षण ओबीसी को नहीं दे पा रही है वहीं कांग्रेस केवल सुर्खियों में बनने के लिए यह मुद्दा बार-बार उठा रही है ! ओबीसी आरक्षण को लेकर भाजपा व कांग्रेस आमने-सामने है ! सीएम मामले को कोर्ट में फंसा होना बता रहे हैं ,तो जीतू पटवारी बिल लाने की बात कर रहे हैं

ओबीसी आरक्षण के मामले को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने बिना किसी सर्वे और तैयारी के सिर्फचार लाइन का कागज बनाकर आरक्षण देने का ऐलान कर दिया था। इसी वजह से ये मामला अब तक कोर्ट में फंसा हुआ है। सीएम ने कहा कि हमने अधिकारियों से कहा है कि सही आंकड़ों के साथ एक नया कानून तैयार करें, जिसे विधानसभा में लाया जाएगा। सरकार इस पर तेजी से काम कर रही है।

ओबीसी आरक्षण को लेकर सीएम का कांग्रेस पर हमला —सरकार आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्धः

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। अभी जो 14 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है, उसके अलावा बाकी लोगों को भी फायदा मिले, इसके लिए सरकार कोशिश कर रही है। अब ऐसे छात्र जो कोर्ट केस की वजह से ज्वॉइनिंग नहीं ले पाए, उन्हें नी ज्वॉइनिंग दिलाने की कोशिश की जाएगी।

कांग्रेस सिर्फ जनता को भ्रमित करती है

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सिर्फजनता को भ्रमित करने का काम करती है। अब वह जातिगत जनगणना का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, जबकि इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि कांग्रेस की सरकार 70 साल तक रही, लेकिन उसने कभी जातिगत जनगणना नहीं करवाई। बल्कि 1953 में प्रधानमंत्री नेहरू ने इसे बंद करवा दिया था, जबकि यह अंग्रेजों के समय से चल रही थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने न तो ओबीसी वर्ग को आरक्षण दिया और न ही किसी ओबीसी नेता को मुख्य बनाया हमारी सरकार ने ओबीसी और सामान्य वर्ग दोनों को आरक्षण दिया है और सभी वर्गों के हित में काम कर रही है

जीतू पटवारी ने सीएम को लिया आड़े हाथों

कहा चार लाइन लिखकर कोई कानून बनता है क्या

मप्र में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पलटवार किया है। पटवारी ने सोमवार को यहां मीडिया से चर्चा में कहा कि ओबीसी के लोगों के साथ अन्याय और अत्याचार हो रहा है। मुख्यमंत्री कहते हैं कि एक पर्ची पर 4 लाइनें लिखकर कोई कानून बनता है क्या? विधानसभा में कानून बना, अध्यादेश विधानसभा से पारित हुआ, प्रशासनिक स्वीकृति हुई। उसको एप्लीकेबल करके राज्यपाल के पास भेजा गया। यही अधिकारी थे, जिन्होंने भेजा था। उनको मुख्यमंत्री कहते हैं कि पर्ची पर चार लाइन लिख दी। यह भाषा है मुख्यमंत्री की? बिल पर बिल लाने की बात करना एक तरह से उनकी राजनीतिक अपरिपक्वता बताती है।

डेढ़ साल में चार पीएस क्यों बदल गए?

सीएम सचिवालय में तबादलों को लेकर जीतू पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री सचिवालय में डेढ़ साल में चार प्रमुख सचिव बदल गए, क्यों? इसका क्या लॉजिक है। मुख्यमंत्री अधिकारियों का चयन सही नहीं कर पाए या फिर उनकी चाहत पूरी नहीं हो पाई होगी। इससे सरकार की कार्यशैली पता चलती है। यह दर्शाता है कि प्रदेश में प्रशासनिक अराजकता है। प्रशासन कमजोर है और कानून-व्यवस्था भी बिगड़ती जा रही है। युवाओं को न रोजगार मिल रहा है, न ही किसानों को मदद। सरकार सिर्फ ईवेंट कर रही है, जमीनी काम नहीं हो रहे हैं।

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