Sat. Mar 7th, 2026

धधकते अंगारों पर चलकर श्रद्धालु पहुंचे मंदिर

शोक संतृप्त परिवार के घरों पहुंच कर सामूहिक गैर निकाल कर रंग गुलाल डालने उनके घर पहुंचे

,कानवन- केलाश राठौड़

:- गुरुवार को गली मोहल्लों में पारंपरिक होलिका सनातनी हिंदू धर्म परंपरा अनुसार किया। लकड़ी ओर कंडो से होलिका का निर्माण कर सजाया गया। शनिवार तड़के निर्मित होलिका का ढोल धमाके से आग के हवाले किया। बाद प्रातः बाद यूवाओ ओर बच्चों में रंग बिरंगे, गिले-सुखे रंगों बौछार को एक दूसरे पर छिड़काव कर शांति पूर्वक,मनाया गया सुबह होलिका दहन के बाद,होलिका के आसपास नारियल ओर पानी से भरा कलश (लोटा) से जल चढ़कर होलिका को ठंडा करने की परंपरा निभाई।आज के दिन हिंदू समाज वर्ग के लोग परम्परा का निर्वाह करते हुएशोक संतृप्त परिवार के घरों पहुंच कर सामूहिक गैर निकाल कर रंग गुलाल डालने उनके घर पहुंचे। वही बच्चों में रंगों का बड़ा उत्साह पानी के रंगों से पिचकारियों से एक दूसरे से छिड़कते बड़े उत्साहित देखा गया। । शाम को नीलकेश्वर महादेव में प्रांगण में धधकते अंगारों से चूल निर्माण की। मन्नतधारियों ने हाथों में जल का लोटा नारियल लेकर नीलकंठ महादेव पर जल चढ़ाने के लिए इसी धधकते अंगारों की चूल से निकलते हुए मंदिर में जल चढ़ाकर वह, पुनः इस आग से निकल – कर अपनी मन्नत पूरी की मान्यता है कि मन्नत धारी कोई 5 वर्ष के लिए, कोई तीन वर्ष है कोई 11 वर्ष तक मन्नत कीपरंपरा निभाते हैं।

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