
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर अटकलो का दौर जारी, कई दिग्गज प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में
चौंकाने वाले नाम का पार्टी कर सकती है ऐलान

न्यूज़ डेस्क
प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक चुनाव सम्पन्न होने के बाद से प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा का इंतजार बेसब्री किया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है पर एक दर्जन से अधिक नेता इस पद की दौड़ में शामिल हैं। क्षेत्रीय और जातिगत गणित को लेकर भी दावेदारों ने दिल्ली दरबार में अपनी बात पहुंचाना शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि केन्द्रीय नेतृत्व स्थापित नेताओं की बजाए किसी नए चेहरे को भी मौका दे सकता है।
किस वर्ग से होगा अगला अध्यक्षअध्यक्ष किस वर्ग से होगा यह अभी तय नहीं है पर बीडी शर्मा सामान्य वर्ग से आते हैं, लिहाजा इसी वर्ग से अध्यक्ष तय होगा, इसकी संभावना ज्यादा जताई जा रही है। हालांकि अनुसूचित जाति और जनजाति के कई नेता भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं भाजपा द्वारा दिल्ली में महिला मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद से अब प्रदेश अध्यक्ष के पद पर किसी महिला को कमान सौपना मुश्किल नजर आ रहा है।
कौन कौन दौड़ में
प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों में एससी वर्ग से देवास सांसद डॉ. महेन्द्र सोलंकी और पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य का नाम सबसे आगे है। महेन्द्र सोलंकी संघ से जुड़े होने के कारण काफी चर्चा में है। वह पूर्व न्यायाधीश हैं। उनके लिए सबसें महत्वपूर्ण यह भी है कि वह पार्टी की गुटबाजी में किसी भी गुट से नहीं जुडे हैं। इसलिए पार्टी इन पर दांव खेल सकतीराजेंद्र शुक्ल,लाल सिंह आर्य, प्रो. सुमेर सिह के नाम पर सभी वरिष्ठ नेता भी सहमत हो सकते हैं। लाल सिंह आर्य पूर्व में प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में पार्टी के एससी वर्ग का बड़ा चेहरा हैं। वर्तमान में पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पार्टी आलाकमान से नजदीकी भी उनके लिए सहायक हो सकती है।
एसटी वर्ग से राज्य सभा सदस्य प्रो. सुमेर सिंह सोलंकी एवं सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का नाम है। सुमेर सिंह सोलंकी भी संघ की पसंद माने जाते हैं। उन्होंने निमाड़ क्षेत्र में आदिवासियों के हितों के लिए काफी काम किया है। युवा होने के साथ सुमेर सिंह, हेमंत खण्डेलवाल,डॉ. महेंन्द्र सोलंकी की तेज-तर्रार नेता की छवि है।

फग्गन सिंह कुलस्ते पूर्व केन्द्रीय मंत्री है। है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद होने के साथ ही एसटी वर्ग के बड़े नेता हैं। इस बार उन्हें केन्द्र सरकार में मंत्री पद नहीं मिल सका है।वैश्य वर्ग से बैतूल से विधायक हेमंत खण्डेलवाल का नाम है वह पूर्व सांसद भी हैं। वह पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं। संघ की पंसद एवं शांत स्वभाव और पार्टी लाइन पर चलने के कारण हेमंत का नाम वैश्य वर्ग से सबसे आगे है।
शाह — विजयवर्गीय की चर्चा ने नया रूप लियापिछले दिनों केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की कैलाश विजयवर्गीय से भोपाल एयरपोर्ट पर हुई चर्चा के बाद नए समीकरण बन रहे हैं। अब उनका नाम भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हो चुका है। कैलाश पार्टी के कद्दावर नेता है। वह प्रदेश सरकार में मंत्री है पूर्व में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व भी संभाल चुके है।

नरोत्तम मिश्रा से मिले कई नेतावहीं ब्राह्मण वर्ग से पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम भी बड़े दावेदारों में शामिल है। डॉ. मिश्रा के आला नेताओं से बेहतर रिश्ते हैं। पार्टी कई मौके पर महत्वपूर्ण जवाबदारी दे चुकी है जिसमें वह सफल भी रहे हैं। कई प्रदेशों के विधानसभा चुनाव में उन्हे कई विधानसभा सीट का प्रभार सौपा गया है जिसमें वह पार्टी की रणनीति को सफल बनाने में सहायक हुए है। मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने उन्हे न्यू ज्वाइनिंग टोली का प्रमुख बनाया था जिसके बाद कांग्रेस और दूसरे दलों के बड़े नेताओं को भाजपा में शामिल करके उन्होंने विपक्षी दलों को बड़ा झटका दिया था।
