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महाराणा प्रताप की प्रतिमा, धर्मशाला व मन्दिर निर्माण में पंवार की अहम भुमिका रही

अंतरसिंह पंवार ने राजपूत समाज अध्यक्ष रहते समाज को संगठित करने में दिया योगदान

पंवार की महाराणा प्रताप की प्रतिमा, धर्मशाला व मन्दिर निर्माण में अहम भुमिका रही

सर्मपण भाव के कारण ही लोगों ने इन्हे दा साहब की उपाधि से सम्मानित किया

चीफ एडिटर/महेश पाटीदार

बदनावर। सर्व समाज को साथ लेकर सबकी खुशी में अपनी खुशी देखना। किसी भी समाज के आयोजन में सहभागिता कर स्वागत करने की परंपरा का निर्वाहन करना। कई मंदिर निर्माण में अहम योगदान देकर स्थापित करने का काम लगन से किया। राजपूत समाज की धरोहर महाराणा प्रताप धर्मशाला का निर्माण एवं महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित करने में नींव के पत्थर के भांति काम किया। कई सालों से राजपूत समाज अध्यक्ष के दायित्व का निर्वाहन कर समाज को संगठित करने में सराहनीय योगदान दिया।

जी हां हम बात कर रहे है राजपूत समाज अध्यक्ष अंतरसिंह पंवार की। पंवार पिछले कई सालों से राजपूत समाज के अध्यक्ष का दायित्व निर्वाहन कर रहे हे। इन्ही के नेतृत्व में बदनावर में माथुर कालोनी में समाज की धरोहर महाराणा प्रताप धर्मशाला लगभग 12 हजार स्केअर फीट में आकार लिया। पंवार के मार्गदर्शन में ही बडी चौपाटी पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा की स्थापना की नींव रखी गयी। पंवार के मार्गदर्शन में राजपूत समाज के कई आयोजन को मुर्त रुप दिया गया।

सभामंच पर गणेश मंदिर एवं चामुंडा माता मंदिर निर्माण में अहम भुमिका-

राजपूत समाज अध्यक्ष अंतरसिंह पंवार द्वारा जातिवाद से उपर उठकर सर्व समाज के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किया गया। सभामंच चौराहे पर भगवान श्री गणेशजी के मंदिर का निर्माण इन्ही के मार्गदर्शन में किया गया। मंदिर निर्माण से लेकर कलश स्थापना एवं प्राण प्रतिश्ठा में भी योगदान रहा। हरिजन बस्ती में चामुडा माता मदिर इन्ही के द्वारा किये गए आर्थिक सहयोग से निर्मित किया गया।

सर्वधर्म के जुलूस व शोभायात्रा का करते है पुष्पो से स्वागत-

बदनावर नगर में किसी भी जाति व धर्म का जुलूस व शोभायात्रा निकलने केे दौरान अंतरसिंह पंवार द्वारा पुश्प वर्षा कर स्वागत किया जाता है। कार्यक्रम छोटा हो या बडा इनका एक ही उदेश्य स्वागत करना रहता है। श्री पंवार को बच्चों से भी काफी लगाव है। वे होली व रंगपंचमी पर बच्चों के होली खेलने के लिए फॅव्वारे लगाने की व्यवस्था स्वयं के खर्च से करते रहते है। दीन हीन दुखी व्यक्ति की सेवा में हमेशा अग्रणी रहते है।परिचितों ने स्नेह भाव के कारण ही दा साहब की उपाधि दीसरल सहज व हमेशा दूसरों की खुशी में खुश होने वाले अंतरसिंह पंवार सामाजिक व धार्मिक कार्य के प्रति समर्पित रहते है। कई बार श्रीमद भागवत कथा के आयोजन में भी अग्रणी रहे। पंवार अपने परिवार एवं परिचितों के प्रति भी सर्मिर्पत रहते है। इनके सर्मपण भाव के कारण ही लोगों ने इन्हे दा साहब की उपाधि से सम्मानित किया है।

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